शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010
बुधवार, 29 दिसंबर 2010
खबर छपी थी अखबारों में
इस गाँव की गलियों ने ही
हसना रोना और भागना
हमको है सिखलाया .
पर छुपना यहाँ बड़ा मुश्किल था
लोग सभी घर गाँव के अपने
पर कोई पराया था या
यह तब समझ नहीं थी
सबका घर अपना घर था
था कोई नहीं पराया
चौपालों में धूम चौकड़ी
खलिहानों की लूका छुपी
पर हमने उनमे खेल खेल में
कभी न आग लगाया .
खबर छपी थी अखबारों में
चाचा के खलिहान जल गए
आशा नहीं थी जिनसे उनको
उनसे ही यह भूल हुयी थी
सब्र बड़ा था तब भी उनमे
जब पता चला भतीजों ने ही
अपना करम बिगाड़ा।
सबका घर अपना घर था
था कोई नहीं पराया
चौपालों में धूम चौकड़ी
खलिहानों की लूका छुपी
पर हमने उनमे खेल खेल में
कभी न आग लगाया .
खबर छपी थी अखबारों में
चाचा के खलिहान जल गए
आशा नहीं थी जिनसे उनको
उनसे ही यह भूल हुयी थी
सब्र बड़ा था तब भी उनमे
जब पता चला भतीजों ने ही
अपना करम बिगाड़ा।
इस गाँव की गलियों ने ही
हसना रोना और भागना
हमको है सिखलाया . बुधवार, 17 मार्च 2010
मेरा घर
डॉ.लाल रत्नाकर
मेरे घर के .......................................................
सलामत सपने
बचेंगे कैसे
इनको देखो
घूम रहे बंजारा
बनके जब
सलामत है
इज्जत कहाँ जब
संभाले मन
मनमाना ये
मन विचलित है
संतोष नहीं
मेरे घर के .......................................................
सलामत सपने
बचेंगे कैसे
इनको देखो
घूम रहे बंजारा
बनके जब
सलामत है
इज्जत कहाँ जब
संभाले मन
मनमाना ये
मन विचलित है
संतोष नहीं
सोमवार, 1 मार्च 2010
सोमवार, 23 नवंबर 2009
बुधवार, 26 अगस्त 2009
मेरा घर
सोमवार, 24 अगस्त 2009
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